NCERT कक्षा 12 हिंदुस्तानी संगीत गायन एवं वादन बुक PDF
यह पाठ्यपुस्तक उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत (गायन और वादन) के ऐतिहासिक, सैद्धांतिक और क्रियात्मक पक्षों का समग्र अध्ययन प्रस्तुत करती है। इसमें प्राचीन ग्रंथों, राग-वर्गीकरण, विभिन्न गायन शैलियों, वाद्य यंत्रों और प्रमुख तालों का विस्तार से वर्णन किया गया है, जो संगीत के विद्यार्थियों व अकादमिक परीक्षाओं के लिए एक संपूर्ण मार्गदर्शिका है।
खंड-वार अध्याय सूचकांक एवं PDF डाउनलोड
| अध्याय / क्रम | अध्याय का नाम और डाउनलोड लिंक |
|---|---|
| क. शास्त्र (Theory) | |
| अध्याय 1 | भारतीय संगीत का इतिहास |
| अध्याय 2 | हमारे प्राचीन ग्रंथ |
| अध्याय 3 | हिंदुस्तानी संगीत के पारिभाषिक शब्द |
| अध्याय 4 | प्राचीन एवं आधुनिक गायन शैलियाँ |
| अध्याय 5 | राग वर्गीकरण |
| ख. क्रियात्मक (Practical) | |
| अध्याय 6 | राग परिचय एवं बंदिशें |
| अध्याय 7 | हिंदुस्तानी संगीत में वाद्य यंत्र |
| अध्याय 8 | प्रमुख तालों के ठेके एवं लयकारी |
| अध्याय 9 | संगीत के प्रमुख कलाकारों का परिचय व योगदान |
संगीत (गायन एवं वादन) पाठ्यक्रम का शैक्षणिक व सांस्कृतिक महत्व
कक्षा 12 का यह पाठ्यक्रम केवल कलात्मक प्रस्तुति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ध्वनि विज्ञान, श्रुति-स्वर व्यवस्था और प्राचीन ग्रंथकारों के योगदान का एक सूक्ष्म सैद्धांतिक और व्यावहारिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
मुख्य सैद्धांतिक एवं क्रियात्मक विमर्श:
- ऐतिहासिक एवं शास्त्रीय आधार (भाग-क): यह खंड नाट्यशास्त्र, बृहद्देशी, संगीत रत्नाकर और संगीत पारिजात जैसे प्राचीन ग्रंथों के माध्यम से श्रुति, स्वर, ग्राम और मूर्च्छना के विकास को स्पष्ट करता है। इसमें ध्रुपद, धमार, ख्याल और तराना जैसी प्राचीन व आधुनिक गायन शैलियों तथा थाट-राग वर्गीकरण प्रणाली का गहन अध्ययन शामिल है।
- प्रयोगात्मक सौंदर्यबोध (भाग-ख): यहाँ विभिन्न रागों (जैसे—भैरव, बागेश्री, मालकौंस आदि) की पकड़, आलाप और तान के साथ बंदिशों की प्रस्तुति का अभ्यास कराया जाता है। इसके अतिरिक्त यह तानपूरा व हारमोनियम जैसे वाद्य यंत्रों की संरचना और वादन तकनीक को भी समझाता है।
- लयकारी और महान संगीतज्ञ: यह खंड प्रमुख तालों (जैसे—त्रिताल, रूपक, झपताल) को दुगुन, तिगुन और चौगुन में लिपिबद्ध करने की तकनीक सिखाता है और पंडित विष्णु नारायण भातखंडे, तानसेन, व उस्ताद बड़े गुलाम अली खां जैसी महान विभूतियों के योगदान को रेखांकित करता है।
सत्र 2026-27 के लिए विशेष अध्ययन रणनीति:
- स्वर-लिपि और ताल-लिपि का अभ्यास: बोर्ड परीक्षाओं में बंदिशों (स्थायी और अंतरा) की स्वर-लिपि और विभिन्न तालों के ठेके (मात्रा, ताली, खाली के चिह्नों सहित) लिखने के प्रश्न सर्वाधिक अंक दिलाते हैं। इनका नियमित लिखित अभ्यास करें।
- पारिभाषिक शब्दावली की स्पष्टता: उत्तर लिखते समय मींड, गमक, खटका, मुर्क़ी और कण-स्वर जैसे तकनीकी शब्दों की सटीक परिभाषाएं एवं उदाहरण अवश्य दें। इससे सैद्धांतिक उत्तरों में प्रामाणिकता आती है।
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