NCERT कक्षा 12 भारतीय कला का इतिहास (ललित कला) बुक PDF
"भारतीय कला का इतिहास" (भाग II) भारत की सौंदर्यवादी और सांस्कृतिक विरासत के दृश्य विकास की पड़ताल करता है। लघु चित्रकला शैलियों (Miniature paintings) के सूक्ष्म विवरणों से लेकर बंगाल स्कूल और आधुनिक भारतीय कला के सामाजिक-राजनीतिक आंदोलनों तक, यह पाठ्यपुस्तक सीबीएसई (CBSE) ललित कला के छात्रों तथा UPSC/CUET उम्मीदवारों के लिए एक अनिवार्य मार्गदर्शिका है।
अध्याय-वार भारतीय कला का इतिहास PDF डाउनलोड
| अध्याय संख्या | अध्याय का नाम और डाउनलोड लिंक |
|---|---|
| अध्याय 1 | पांडुलिपि चित्रकला की परंपरा |
| अध्याय 2 | राजस्थानी चित्रकला शैली |
| अध्याय 3 | मुगलकालीन लघु चित्रकला |
| अध्याय 4 | दक्कनी चित्रकला शैली |
| अध्याय 5 | पहाड़ी चित्रकला शैली |
| अध्याय 6 | बंगाल स्कूल और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद |
| अध्याय 7 | आधुनिक भारतीय कला |
| अध्याय 8 | भारत की जीवंत कला परंपराएँ |
सौंदर्यशास्त्रीय एवं सांस्कृतिक ढांचा
कक्षा 12 के ललित कला (चित्रकला/ग्राफिक्स/मूर्तिकला) के सैद्धांतिक पाठ्यक्रम में केवल तिथियां याद रखना पर्याप्त नहीं है; इसके लिए ऐतिहासिक कलाकृतियों के आलोचनात्मक दृश्य विश्लेषण (Visual Analysis) की आवश्यकता होती है। बोर्ड परीक्षाओं में उच्च अंक प्राप्त करने के लिए विशिष्ट कलाकृतियों के संयोजन, रंग-संयोजन और सांस्कृतिक संदर्भों का सटीक वर्णन आवश्यक है।
मुख्य कलात्मक वर्गीकरण:
- लघु चित्रकला परंपराएँ (अध्याय 1-5): यह ताड़-पत्र की पांडुलिपियों से लेकर क्षेत्रीय शैलियों तक के विकास को दर्शाता है। इसमें राजस्थानी शैली के चटख रंगों, मुगल दरबार के यथार्थवाद (Realism), पहाड़ी (कांगड़ा/बसोहली) शैलियों के गीतात्मक रोमांस और दक्कनी शैली के समृद्ध स्वर्ण तत्वों का तुलनात्मक अध्ययन शामिल है।
- सांस्कृतिक राष्ट्रवाद (अध्याय 6): अवनींद्रनाथ टैगोर द्वारा पश्चिमी अकादमिक शैलियों की अस्वीकृति और 'बंगाल स्कूल' की स्थापना का विश्लेषण, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन को ऊर्जा देने के लिए 'वॉश तकनीक' (Wash technique) और स्वदेशी विषयों का उपयोग किया।
- आधुनिक और जीवंत कलाएं (अध्याय 7-8): समकालीन अमूर्तवाद और अभिव्यंजनावाद (अमृता शेरगिल, एम.एफ. हुसैन) में संक्रमण के साथ-साथ भारत भर में स्वदेशी शिल्पों और जीवंत जनजातीय/लोक कला परंपराओं (जैसे—वर्ली, मधुबनी) का दस्तावेजीकरण।
परीक्षा 2026-27 के लिए विशेष रणनीति:
- मानकीकृत दृश्य विश्लेषण: किसी विशिष्ट चित्र (जैसे- मारू रागिनी या बनी ठनी) का वर्णन करते समय हमेशा स्पष्ट उप-शीर्षकों का उपयोग करें: शीर्षक, कलाकार, उप-शैली, माध्यम, काल और संयोजन व्यवस्था (Compositional Arrangement)।
- औपचारिक कला शब्दावली का प्रयोग: साधारण वर्णनों से आगे बढ़ें। अधिकतम अंक प्राप्त करने के लिए 'रेखीय लालित्य' (Linear grace), 'वायवीय परिप्रेक्ष्य' (Aerial perspective), 'एक-चश्म चेहरे' (Profile faces), और 'अपारदर्शी जल रंग' (Gouache) जैसी औपचारिक सौंदर्य शब्दावली का प्रयोग करें।
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